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mahabharat 1.136.6: हे सारथिपुत्र! तुम अर्जुन के हाथों मरने के भी योग्य नहीं हो। तुम्हें शीघ्र ही चाबुक हाथ में ले लेना चाहिए; क्योंकि यही तुम्हारे कुल के अनुरूप है।   |   mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.136.6 
न त्वमर्हसि पार्थेन सूतपुत्र रणे वधम्।
कुलस्य सदृशस्तूर्णं प्रतोदो गृह्यतां त्वया॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे सारथिपुत्र! तुम अर्जुन के हाथों मरने के भी योग्य नहीं हो। तुम्हें शीघ्र ही चाबुक हाथ में ले लेना चाहिए; क्योंकि यही तुम्हारे कुल के अनुरूप है।
 
‘Oh son of a charioteer! You are not even worthy of dying at the hands of Arjun. You should soon take up the whip in your hand; because this is in keeping with your lineage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)