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mahabharat 1.136.3: अधिरथ ने अपने पैर वस्त्र के किनारे से छिपा लिए और स्वयं को धन्य मानते हुए पुकारा, "पुत्र! पुत्र!"   |   mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.136.3 
तत: पादाववच्छाद्य पटान्तेन ससम्भ्रम:।
पुत्रेति परिपूर्णार्थमब्रवीद् रथसारथि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अधिरथ ने अपने पैर वस्त्र के किनारे से छिपा लिए और स्वयं को धन्य मानते हुए पुकारा, "पुत्र! पुत्र!"
 
Adhiratha hid his feet behind the edge of his cloth and considered himself blessed, calling out, "Son! Son!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)