Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.136.25: वीर कर्ण ने अस्त्र-शस्त्रों का अभ्यास करने में बहुत परिश्रम किया था। वह भी दुर्योधन से अत्यंत स्नेह और सान्त्वनापूर्वक बातें करने लगा। उस समय युधिष्ठिर को भी विश्वास हो गया कि इस पृथ्वी पर कर्ण के समान कोई धनुर्धर नहीं है॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वीर कर्ण ने अस्त्र-शस्त्रों का अभ्यास करने में बहुत परिश्रम किया था। वह भी दुर्योधन से अत्यंत स्नेह और सान्त्वनापूर्वक बातें करने लगा। उस समय युधिष्ठिर को भी विश्वास हो गया कि इस पृथ्वी पर कर्ण के समान कोई धनुर्धर नहीं है॥ 25॥
The valiant Karna had put in a lot of effort in practising weapons. He too began to talk to Duryodhan with utmost affection and consolation. At that time Yudhishthira also became convinced that there is no archer like Karna on this earth.॥ 25॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि अस्त्रदर्शने षट्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें अस्त्र-कौशलदर्शनविषयक एक सौ छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल २६ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥