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mahabharat 1.136.24: हे जनमेजय! उस समय कर्ण को मित्र पाकर दुर्योधन का भी अर्जुन के प्रति भय शीघ्र ही दूर हो गया॥24॥   |   mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.136.24 
दुर्योधनस्यापि तदा कर्णमासाद्य पार्थिव।
भयमर्जुनसंजातं क्षिप्रमन्तरधीयत॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! उस समय कर्ण को मित्र पाकर दुर्योधन का भी अर्जुन के प्रति भय शीघ्र ही दूर हो गया॥24॥
 
O Janamejaya! At that time, having Karna as a friend, even Duryodhan's fear of Arjuna was quickly dispelled. ॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)