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mahabharat 1.136.23: कुंती अपने दिव्य लक्षणों से युक्त अंगराज पुत्र कर्ण को पहचानकर बहुत प्रसन्न हुई; परन्तु उसने दूसरों को यह बात नहीं दिखाई॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.136.23 
कुन्त्याश्च प्रत्यभिज्ञाय दिव्यलक्षणसूचितम्।
पुत्रमङ्गेश्वरं स्नेहाच्छन्ना प्रीतिरजायत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कुंती अपने दिव्य लक्षणों से युक्त अंगराज पुत्र कर्ण को पहचानकर बहुत प्रसन्न हुई; परन्तु उसने दूसरों को यह बात नहीं दिखाई॥ 23॥
 
Kunti felt very happy on recognising her son Karna, the king of Angas, who was marked with divine features; but she did not show it to others.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)