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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.136.20 
ततो दुर्योधन: कर्णमालम्ब्याग्रकरे नृप:।
दीपिकाग्निकृतालोकस्तस्माद् रङ्गाद् विनिर्ययौ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब दुर्योधन ने कर्ण के हाथ की उंगलियां पकड़ीं, मशाल जलाई और रंगशाला से बाहर चला गया।
 
Then Duryodhana held the fingers of Karna's hand, lit the torch and went out of the theatre.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)