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mahabharat 1.136.18: 'जो मनुष्य मेरे इस प्रकार के आचरण को सहन न कर सके, वह रथ पर चढ़कर, पैरों से धनुष को झुकाकर, हमारे साथ युद्ध करने के लिए तैयार हो जाए।'॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.136.18 
यस्य वा मनुजस्येदं न क्षान्तं मद्विचेष्टितम्।
रथमारुह्य पद्भॺां स विनामयतु कार्मुकम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'जो मनुष्य मेरे इस प्रकार के आचरण को सहन न कर सके, वह रथ पर चढ़कर, पैरों से धनुष को झुकाकर, हमारे साथ युद्ध करने के लिए तैयार हो जाए।'॥18॥
 
'The person who cannot tolerate my behavior like this should mount the chariot, bow his bow with his feet and get ready to fight with us.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)