Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.136.16: मैं भली-भाँति जानता हूँ कि तुम सब भाइयों का जन्म किस प्रकार हुआ है। सूर्य के समान तेजस्वी, समस्त शुभ चिह्नों से सुशोभित, कुण्डल और कवच से युक्त कर्ण सूत जाति की स्त्री का पुत्र कैसे हो सकता है? क्या कोई हिरणी अपने गर्भ से व्याघ्र को जन्म दे सकती है?॥ 16॥ | mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भवतां च यथा जन्म तदप्यागमितं मया।
सकुण्डलं सकवचं सर्वलक्षणलक्षितम्।
कथमादित्यसदृशं मृगी व्याघ्रं जनिष्यति॥ १६॥
अनुवाद
मैं भली-भाँति जानता हूँ कि तुम सब भाइयों का जन्म किस प्रकार हुआ है। सूर्य के समान तेजस्वी, समस्त शुभ चिह्नों से सुशोभित, कुण्डल और कवच से युक्त कर्ण सूत जाति की स्त्री का पुत्र कैसे हो सकता है? क्या कोई हिरणी अपने गर्भ से व्याघ्र को जन्म दे सकती है?॥ 16॥
'I know very well how all of you brothers were born. How can Karna, who is as radiant as the Sun and adorned with all auspicious signs and born with earrings and armour, be the son of a woman belonging to the Suta caste? Can a deer give birth to a tiger from her womb?॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥