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mahabharat 1.136.11: क्षत्रियों में बल ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। यदि तुम बलवान हो, तो तुम्हें क्षत्रबन्धु (अवर क्षत्रिय) से भी युद्ध करना चाहिए (अथवा मैं क्षत्रिय का मित्र हूँ, इसलिए कर्ण से भी युद्ध करना चाहिए)। वीर योद्धाओं और नदियों की उत्पत्ति का वास्तविक कारण जानना बहुत कठिन है।॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.136.11 
क्षत्रियाणां बलं ज्येष्ठं योद्धव्यं क्षत्रबन्धुना।
शूराणां च नदीनां च दुर्विदा: प्रभवा: किल॥ ११॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रियों में बल ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। यदि तुम बलवान हो, तो तुम्हें क्षत्रबन्धु (अवर क्षत्रिय) से भी युद्ध करना चाहिए (अथवा मैं क्षत्रिय का मित्र हूँ, इसलिए कर्ण से भी युद्ध करना चाहिए)। वीर योद्धाओं और नदियों की उत्पत्ति का वास्तविक कारण जानना बहुत कठिन है।॥ 11॥
 
‘Strength is the most important thing among Kshatriyas. If you are strong, you should fight even with Kshatrabandhu (inferior Kshatriya) (or you should fight with Karna as I am a friend of Kshatriya). It is very difficult to know the real reason behind the origin of brave warriors and rivers.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)