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mahabharat 1.135.30: उन दोनों को विशाल धनुष धारण किए हुए देखकर शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य, जो द्वंद्वयुद्ध की युक्तियों में कुशल तथा समस्त धर्मों के ज्ञाता थे, इस प्रकार बोले - 30॥   |   mahabharat अध्याय 1.135: कर्णका रंगभूमिमें प्रवेश तथा राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 135: कर्णका रंगभूमिमें प्रवेश तथा राज्याभिषेक  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.135.30 
तावुद्यतमहाचापौ कृप: शारद्वतोऽब्रवीत्।
द्वन्द्वयुद्धसमाचारे कुशल: सर्वधर्मवित्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों को विशाल धनुष धारण किए हुए देखकर शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य, जो द्वंद्वयुद्ध की युक्तियों में कुशल तथा समस्त धर्मों के ज्ञाता थे, इस प्रकार बोले - 30॥
 
Seeing both of them holding huge bows, Kripacharya, son of Sharadvan, who was skilled in the tactics and methods of duel and knowledgeable about all religions, said thus - 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)