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mahabharat 1.135.3: कुंती ने उसे कन्या अवस्था में ही गर्भ में धारण कर लिया था। उसकी कीर्ति सर्वत्र फैल गई थी। उसके दोनों नेत्र बड़े-बड़े थे। शत्रु समुदाय का संहार करने वाला कर्ण प्रचण्ड किरणों वाला भगवान भास्कर का अंश था।   |   mahabharat अध्याय 1.135: कर्णका रंगभूमिमें प्रवेश तथा राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 135: कर्णका रंगभूमिमें प्रवेश तथा राज्याभिषेक  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.135.3 
कन्यागर्भ: पृथुयशा: पृथाया: पृथुलोचन:।
तीक्ष्णांशोर्भास्करस्यांश: कर्णोऽरिगणसूदन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुंती ने उसे कन्या अवस्था में ही गर्भ में धारण कर लिया था। उसकी कीर्ति सर्वत्र फैल गई थी। उसके दोनों नेत्र बड़े-बड़े थे। शत्रु समुदाय का संहार करने वाला कर्ण प्रचण्ड किरणों वाला भगवान भास्कर का अंश था।
 
Kunti had conceived him in her womb when she was a girl. His fame had spread everywhere. Both his eyes were large. Karna, who was the destroyer of the enemy community, was a part of Lord Bhaskar with intense rays.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)