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श्लोक  1.135.29 
तत: प्रत्यागतप्राणा तावुभौ परिदंशितौ।
पुत्रौ दृष्ट्वा सुसम्भ्रान्ता नान्वपद्यत किंचन॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इससे कुंती को होश तो आया, लेकिन जब उसने अपने दोनों पुत्रों को युद्ध के लिए कवच पहने देखा, तो वह बहुत भयभीत हो गई। उसे उन्हें रोकने का कोई उपाय नहीं सूझा।
 
This brought Kunti to her senses; but she became very frightened when she saw both her sons wearing armor for war. She could not think of any way to stop them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)