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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 135: कर्णका रंगभूमिमें प्रवेश तथा राज्याभिषेक  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.135.28 
तां तथा मोहमापन्नां विदुर: सर्वधर्मवित्।
कुन्तीमाश्वासयामास प्रेष्याभिश्चन्दनोदकै:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उसे अचेत अवस्था में पड़ा देख सभी धर्मों के ज्ञाता विदुर जी ने अपनी दासियों से उस पर चंदन मिश्रित जल छिड़कवाकर उसे होश में लाने का प्रयास किया।
 
Seeing her lying unconscious, Vidur ji, who was well versed in all religions, tried to revive her by having his maids sprinkle water mixed with sandalwood on her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)