तत: समाप्तभूयिष्ठे तस्मिन् कर्मणि भारत।
मन्दीभूते समाजे च वादित्रस्य च नि:स्वने॥ २६॥
द्वारदेशात् समुद्भूतो माहात्म्यबलसूचक:।
वज्रनिष्पेषसदृश: शुश्रुवे भुजनि:स्वन:॥ २७॥
अनुवाद
जब शस्त्र-कौशल का अधिकांश प्रदर्शन समाप्त हो गया और लोगों का शोर तथा वाद्य-यंत्रों की ध्वनि शांत होने लगी, तब द्वार की ओर से किसी के हाथ पटकने की तीव्र ध्वनि सुनाई दी, मानो वज्र आपस में टकरा रहे हों। वह ध्वनि किसी वीर पुरुष की महानता और बल की सूचक थी।
When most of the display of weapons skills was over and the noise of people and the sound of musical instruments started to subside, then a loud sound of someone clapping his arms was heard from the door side, as if thunderbolts were clashing with each other. That sound was indicative of the greatness and strength of a brave man. 26-27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥