Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.134.22: अपने गुरु के प्रिय शिष्य अर्जुन ने बड़ी फुर्ती और सुन्दरता के साथ नाना प्रकार के बाणों से उस नाजुक, कोमल और भारी लक्ष्य को बिना हिलाए ही भेद दिया। 22.   |   mahabharat अध्याय 1.134: भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.134.22 
सुकुमारं च सूक्ष्मं च गुरुं चापि गुरुप्रिय:।
सौष्ठवेनाभिसंक्षिप्त: सोऽविध्यद् विविधै: शरै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अपने गुरु के प्रिय शिष्य अर्जुन ने बड़ी फुर्ती और सुन्दरता के साथ नाना प्रकार के बाणों से उस नाजुक, कोमल और भारी लक्ष्य को बिना हिलाए ही भेद दिया। 22.
 
Arjuna, the beloved disciple of his guru, with great agility and beauty pierced the delicate, delicate and heavy target with various kinds of arrows without even shaking it. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)