Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.134.18-19: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! जब हर्ष से परिपूर्ण वह मंच किसी प्रकार शांत हुआ, तब अर्जुन ने गुरु के समक्ष अपनी अस्त्र-कुशलता का प्रदर्शन आरम्भ किया। पहले उसने आग्नेयास्त्र से अग्नि उत्पन्न की, फिर वरुणास्त्र से जल उत्पन्न करके उसे बुझा दिया। वायव्यास्त्र से तूफान उत्पन्न किया और पर्जन्यास्त्र से मेघ उत्पन्न किए। 18-19। | mahabharat अध्याय 1.134: भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! जब हर्ष से परिपूर्ण वह मंच किसी प्रकार शांत हुआ, तब अर्जुन ने गुरु के समक्ष अपनी अस्त्र-कुशलता का प्रदर्शन आरम्भ किया। पहले उसने आग्नेयास्त्र से अग्नि उत्पन्न की, फिर वरुणास्त्र से जल उत्पन्न करके उसे बुझा दिया। वायव्यास्त्र से तूफान उत्पन्न किया और पर्जन्यास्त्र से मेघ उत्पन्न किए। 18-19।
Vaishampayana says - Janamejaya! When the stage, which was filled with joy, somehow calmed down, then Arjun started showing his skill in handling weapons to the teacher. First he created fire with Agneyastra, then he created water with Varunastra and extinguished it. He created a storm with Vayavyastra and created clouds with Parjanyastra. 18-19.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥