श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.134.15 
क्षत्त: क्षुब्धार्णवनिभ: किमेष सुमहास्वन:।
सहसैवोत्थितो रङ्गे भिन्दन्निव नभस्तलम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'विदुर! यह समुद्र के समान महान कोलाहल कैसा है? ऐसा प्रतीत होता है मानो यह ध्वनि आकाश को भेदती हुई अचानक ही रंगमंच पर प्रकट हो गई हो।'॥15॥
 
'Vidur! What is this great uproar like that of a disturbed ocean? It seems as if this sound has suddenly appeared on the stage, piercing the sky.'॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)