Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.133.d2-22: उस समय राजा धृतराष्ट्र ने आचार्य द्रोण और कृपाचार्य को दक्षिणा में स्वर्ण, मणि, रत्न और नाना प्रकार के वस्त्र दिए। फिर सुखदायी स्तुति सुनाकर, दान आदि पुण्य कर्म करके बहुत से लोग नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और उपकरण लेकर उस रंगशाला में आए। 22॥ | mahabharat अध्याय 1.133: राजकुमारोंका रंगभूमिमें अस्त्र-कौशल दिखाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(सुवर्णमणिरत्नानि वस्त्राणि विविधानि च।
प्रददौ दक्षिणां राजा द्रोणस्य च कृपस्य च॥ )
सुखपुण्यार्हघोषस्य पुण्यस्य समनन्तरम्।
विविशुर्विविधं गृह्य शस्त्रोपकरणं नरा:॥ २२॥
अनुवाद
उस समय राजा धृतराष्ट्र ने आचार्य द्रोण और कृपाचार्य को दक्षिणा में स्वर्ण, मणि, रत्न और नाना प्रकार के वस्त्र दिए। फिर सुखदायी स्तुति सुनाकर, दान आदि पुण्य कर्म करके बहुत से लोग नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और उपकरण लेकर उस रंगशाला में आए। 22॥
At that time, King Dhritarashtra gave gold, gems, gems and various types of clothes to Acharya Drona and Kripa as dakshina. Then, after reciting pleasant praises and doing charity and other virtuous deeds, many people entered that theater carrying various types of weapons and equipment. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥