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mahabharat 1.133.7: (आचार्य से ऐसा कहकर राजा धृतराष्ट्र ने विदुर से कहा-) 'धर्मवत्सल विदुर! गुरु द्रोणाचार्य जैसा कार्य करने को कहें, वैसा ही करो। मेरी राय में इससे बढ़कर तुम्हें कोई दूसरा प्रिय कार्य नहीं होगा।'॥ 7॥   |   mahabharat अध्याय 1.133: राजकुमारोंका रंगभूमिमें अस्त्र-कौशल दिखाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 133: राजकुमारोंका रंगभूमिमें अस्त्र-कौशल दिखाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.133.7 
क्षत्तर्यद् गुरुराचार्यो ब्रवीति कुरु तत् तथा।
न हीदृशं प्रियं मन्ये भविता धर्मवत्सल॥ ७॥
 
 
अनुवाद
(आचार्य से ऐसा कहकर राजा धृतराष्ट्र ने विदुर से कहा-) 'धर्मवत्सल विदुर! गुरु द्रोणाचार्य जैसा कार्य करने को कहें, वैसा ही करो। मेरी राय में इससे बढ़कर तुम्हें कोई दूसरा प्रिय कार्य नहीं होगा।'॥ 7॥
 
(After saying this to the Acharya, King Dhritarashtra said to Vidur-) 'Dharmavatsal Vidur! Do the work as Guru Dronacharya tells you to do. In my opinion, there will be no other work as dear to you as this.'॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)