श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.132.7 
भासं पश्यसि यद्येनं तथा ब्रूहि पुनर्वच:।
शिर: पश्यामि भासस्य न गात्रमिति सोऽब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"बेटा! यदि तुम इस गिद्ध को देखो तो मुझे बताओ कि इसके शरीर के अंग कैसे हैं?" अर्जुन ने कहा - "मैं तो केवल गिद्ध का सिर देख रहा हूँ, उसका पूरा शरीर नहीं।" ॥7॥
 
"Son! If you see this vulture then tell me, what are its body parts like?" Arjuna said - "I am only seeing the head of the vulture, not its full body." ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)