श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.132.6 
तत: प्रीतमना द्रोणो मुहूर्तादिव तं पुन:।
प्रत्यभाषत दुर्धर्ष: पाण्डवानां महारथम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इस उत्तर से द्रोण प्रसन्न हुए। मानो दो क्षण पश्चात् दुष्ट द्रोणाचार्य ने पुनः पाण्डव-महाराज अर्जुन से पूछा- ॥6॥
 
Drona was pleased with this answer. As if after two moments, the evil Dronacharya again asked the Pandava-maharaja Arjuna – ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)