श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.132.5 
पश्याम्येकं भासमिति द्रोणं पार्थोऽभ्यभाषत।
न तु वृक्षं भवन्तं वा पश्यामीति च भारत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! यह प्रश्न सुनकर अर्जुन ने द्रोणाचार्य से कहा, 'मुझे केवल गिद्ध ही दिखाई दे रहा है। मैं वृक्ष या आपको नहीं देख पा रहा हूँ।'
 
O Janamejaya! On hearing this question, Arjuna told Dronacharya, 'I see only the vulture. I do not see the tree or you.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)