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mahabharat 1.132.2: मेरी आज्ञा मिलते ही तुम्हें इस पर बाण चलाना होगा। बेटा! धनुष तानकर खड़े रहो और दो क्षण मेरी आज्ञा की प्रतीक्षा करो।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.132.2 
मद्वाक्यसमकालं ते मोक्तव्योऽत्र भवेच्छर:।
वितत्य कार्मुकं पुत्र तिष्ठ तावन्मुहूर्तकम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
मेरी आज्ञा मिलते ही तुम्हें इस पर बाण चलाना होगा। बेटा! धनुष तानकर खड़े रहो और दो क्षण मेरी आज्ञा की प्रतीक्षा करो।॥2॥
 
‘As soon as you get my permission, you will have to shoot an arrow at it. Son! Stand with your bow drawn and wait for my orders for two moments.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)