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mahabharat 1.132.18: महाबाहो! मैं तुम्हें इस ब्रह्मशिरा नामक अस्त्र के विषय में, उसके प्रयोग और प्रयोग सहित बता रहा हूँ। यह समस्त अस्त्रों से श्रेष्ठ है और धारण करने में भी अत्यंत कठिन है। तुम इसे स्वीकार करो।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.132.18 
गृहाणेदं महाबाहो विशिष्टमतिदुर्धरम्।
अस्त्रं ब्रह्मशिरो नाम सप्रयोगनिवर्तनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! मैं तुम्हें इस ब्रह्मशिरा नामक अस्त्र के विषय में, उसके प्रयोग और प्रयोग सहित बता रहा हूँ। यह समस्त अस्त्रों से श्रेष्ठ है और धारण करने में भी अत्यंत कठिन है। तुम इसे स्वीकार करो।॥18॥
 
‘Mahabaho! I am telling you about this weapon named Brahmashira along with its use and conclusion. It is superior to all weapons and it is also very difficult to wear it. You accept it.’॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)