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mahabharat 1.132.11: भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात किसी समय अंगिरसवंशियों में श्रेष्ठ आचार्य द्रोण अपने शिष्यों के साथ गंगाजी में स्नान करने के लिए गए॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 132: अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.132.11 
कस्यचित् त्वथ कालस्य सशिष्योऽङ्गिरसां वर:।
जगाम गङ्गामभितो मज्जितुं भरतर्षभ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात किसी समय अंगिरसवंशियों में श्रेष्ठ आचार्य द्रोण अपने शिष्यों के साथ गंगाजी में स्नान करने के लिए गए॥11॥
 
Bharatshrestha! After that, at some time, Drona, the best teacher among the Angiras dynasty, went with his disciples to take bath in Ganga. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)