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mahabharat 1.131.74: "राजकुमार! वृक्ष की चोटी पर बैठे इस गिद्ध को तो देखो।" तब युधिष्ठिर ने गुरु से कहा - "प्रभो! मैं इसे देख रहा हूँ।" ॥ 74॥   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.131.74 
पश्यैनं तं द्रुमाग्रस्थं भासं नरवरात्मज।
पश्यामीत्येवमाचार्यं प्रत्युवाच युधिष्ठिर:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
"राजकुमार! वृक्ष की चोटी पर बैठे इस गिद्ध को तो देखो।" तब युधिष्ठिर ने गुरु से कहा - "प्रभो! मैं इसे देख रहा हूँ।" ॥ 74॥
 
"Prince! Look at this vulture sitting on the top of the tree." Then Yudhishthira replied to the teacher - "Lord! I am seeing it." ॥ 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)