Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.131.57-58: द्रोणाचार्य के ये कठोर वचन सुनकर, सत्य पर सदैव अडिग रहने वाले एकलव्य ने अपना वचन निभाया और पहले की तरह प्रसन्नचित्त एवं उदार बने रहे तथा बिना कुछ सोचे-समझे अपना दाहिना अंगूठा काटकर द्रोणाचार्य को दे दिया। | mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रोणाचार्य के ये कठोर वचन सुनकर, सत्य पर सदैव अडिग रहने वाले एकलव्य ने अपना वचन निभाया और पहले की तरह प्रसन्नचित्त एवं उदार बने रहे तथा बिना कुछ सोचे-समझे अपना दाहिना अंगूठा काटकर द्रोणाचार्य को दे दिया।
On hearing these harsh words of Dronacharya, Eklavya, who always stood firm on truth, kept his promise and remained cheerful and generous as before and without thinking twice, cut off his right thumb and gave it to Dronacharya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥