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mahabharat 1.131.55-56h: एकलव्य बोला - हे प्रभु! मैं आपको क्या दूँ? गुरुदेव स्वयं मुझे इसकी अनुमति दें। हे ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ गुरुवर! मेरे पास ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो गुरु को अर्पित न की जा सके।   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.131.55-56h 
एकलव्य उवाच
किं प्रयच्छामि भगवन्नाज्ञापयतु मां गुरु:॥ ५५॥
न हि किंचिददेयं मे गुरवे ब्रह्मवित्तम।
 
 
अनुवाद
एकलव्य बोला - हे प्रभु! मैं आपको क्या दूँ? गुरुदेव स्वयं मुझे इसकी अनुमति दें। हे ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ गुरुवर! मेरे पास ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो गुरु को अर्पित न की जा सके।
 
Eklavya said - O Lord! What should I give you? Gurudev himself should give me permission for this. O great teacher among the knowers of Brahman! I do not have any such thing which is not payable to the Guru. 55 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)