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mahabharat 1.131.53: तब निषादपुत्र ने स्वयं को शिष्य के रूप में उनके चरणों में समर्पित कर दिया, गुरु द्रोण की विधिपूर्वक पूजा की और हाथ जोड़कर उनके सामने खड़ा हो गया।   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.131.53 
पूजयित्वा ततो द्रोणं विधिवत् स निषादज:।
निवेद्य शिष्यमात्मानं तस्थौ प्राञ्जलिरग्रत:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तब निषादपुत्र ने स्वयं को शिष्य के रूप में उनके चरणों में समर्पित कर दिया, गुरु द्रोण की विधिपूर्वक पूजा की और हाथ जोड़कर उनके सामने खड़ा हो गया।
 
Then the son of Nishad surrendered himself as a disciple at his feet, worshipped Guru Drona in the proper manner and stood before him with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)