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mahabharat 1.131.51: वहाँ पहुँचकर उसने एकलव्य को देखा, जो धनुष लेकर निरन्तर बाण चला रहा था। उसका शरीर मैल से भरा हुआ था। उसके सिर पर जटाएँ थीं और वस्त्रों के स्थान पर चिथड़े लिपटे हुए थे। 51.   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.131.51 
ददर्श मलदिग्धाङ्गं जटिलं चीरवाससम्।
एकलव्यं धनुष्पाणिमस्यन्तमनिशं शरान्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उसने एकलव्य को देखा, जो धनुष लेकर निरन्तर बाण चला रहा था। उसका शरीर मैल से भरा हुआ था। उसके सिर पर जटाएँ थीं और वस्त्रों के स्थान पर चिथड़े लिपटे हुए थे। 51.
 
Reaching there he saw Eklavya, who was continuously shooting arrows with his bow in his hand. His body was covered with dirt. He had matted hair on his head and instead of clothes he was wrapped in rags. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)