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mahabharat 1.131.5: इन सब बातों को स्वीकार करके एक दिन जब द्रोणाचार्य मन में पूर्ण विश्वास रखकर एकान्त स्थान पर अकेले बैठे हुए थे, तब उन्होंने अपने पास बैठे हुए अपने सब शिष्यों से यह बात कही ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.131.5 
प्रतिगृह्य च तान् सर्वान् द्रोणो वचनमब्रवीत्।
रहस्येक: प्रतीतात्मा कृतोपसदनांस्तथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इन सब बातों को स्वीकार करके एक दिन जब द्रोणाचार्य मन में पूर्ण विश्वास रखकर एकान्त स्थान पर अकेले बैठे हुए थे, तब उन्होंने अपने पास बैठे हुए अपने सब शिष्यों से यह बात कही ॥5॥
 
Having accepted all these, one day when Dronacharya was sitting alone in a secluded place with full faith in his mind, he said this to all his disciples sitting near him. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)