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श्लोक  1.131.45 
एकलव्य उवाच
निषादाधिपतेर्वीरा हिरण्यधनुष: सुतम्।
द्रोणशिष्यं च मां वित्त धनुर्वेदकृतश्रमम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
एकलव्य ने कहा- हे वीरों! आप लोग मुझे निषादराज हिरण्यधनुक का पुत्र और द्रोणाचार्य का शिष्य जानिए। मैंने धनुर्वेद में विशेष परिश्रम किया है॥ 45॥
 
Eklavya said— O heroes! You all should know me as the son of Nishadraj Hiranyadhanuka and a disciple of Dronacharya. I have put in special effort in Dhanurveda.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)