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mahabharat 1.131.35: अपने गुरु पर अटूट विश्वास और कठिन अभ्यास से उन्होंने बाण छोड़ने, वापस लाने और निशाना साधने में बड़ी कुशलता प्राप्त कर ली। 35.   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.131.35 
परया श्रद्धयोपेतो योगेन परमेण च।
विमोक्षादानसंधाने लघुत्वं परमाप स:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अपने गुरु पर अटूट विश्वास और कठिन अभ्यास से उन्होंने बाण छोड़ने, वापस लाने और निशाना साधने में बड़ी कुशलता प्राप्त कर ली। 35.
 
By having great faith in his teacher and by great practice he acquired great agility in releasing, returning and aiming the arrows. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)