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mahabharat 1.131.26: भरत! द्रोण ने सोते समय उसके धनुष की टंकार सुनी, तब वे उठकर उसके पास गए और उसे गले लगाकर बोले॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 1.131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 131: द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.131.26 
तस्य ज्यातलनिर्घोषं द्रोण: शुश्राव भारत।
उपेत्य चैनमुत्थाय परिष्वज्येदमब्रवीत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
भरत! द्रोण ने सोते समय उसके धनुष की टंकार सुनी, तब वे उठकर उसके पास गए और उसे गले लगाकर बोले॥ 26॥
 
Bhaarat! Drona heard the twirling of his bow while he was asleep. Then he got up and went to him and hugged him and said.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)