न दरिद्रो वसुमतो नाविद्वान् विदुष: सखा।
न शूरस्य सखा क्लीब: सखिपूर्वं किमिष्यते॥ ९॥
अनुवाद
सत्य तो यह है कि निर्धन व्यक्ति धनवान का मित्र नहीं हो सकता, मूर्ख व्यक्ति विद्वान का मित्र नहीं हो सकता, तथा कायर व्यक्ति वीर का मित्र नहीं हो सकता; अतः पहले वाले की मित्रता पर विश्वास कैसे किया जा सकता है?
The truth is that a poor man cannot be a friend of a rich man, a fool cannot be a friend of a learned man and a coward cannot be a friend of a brave man; therefore, how can you trust the friendship of the former? 9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)