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mahabharat 1.130.79: हे ब्रह्मन्! अपनी प्रार्थना पूर्ण समझो। हे ब्रह्मर्षि! आपका आना हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। आपने यहाँ आकर मुझ पर बड़ा उपकार किया है। ॥79॥   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.130.79 
यच्च ते प्रार्थितं ब्रह्मन् कृतं तदिति चिन्त्यताम्।
दिष्टॺा प्राप्तोऽसि विप्रर्षे महान् मेऽनुग्रह: कृत:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! अपनी प्रार्थना पूर्ण समझो। हे ब्रह्मर्षि! आपका आना हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। आपने यहाँ आकर मुझ पर बड़ा उपकार किया है। ॥79॥
 
O Brahman! Consider your request fulfilled. O Brahmarshi! It is a matter of great fortune for us that you have come. You have bestowed a great favour on me by coming here. ॥ 79॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि भीष्मद्रोणसमागमे त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें भीष्म-द्रोण-समागमविषयक एक सौ तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)