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mahabharat 1.130.75-76h: भीष्मजी! मैं आपकी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पांचाल देश से कुरुराज्य के इस सुन्दर हस्तिनापुर नगर में प्रतिभाशाली शिष्यों की सहायता से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु आया हूँ। आप मुझे बताइए, मुझे आपका कौन-सा प्रिय कार्य करना चाहिए?॥ 75 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 75-76h
 
 
श्लोक  1.130.75-76h 
अभ्यागच्छं कुरून् भीष्म शिष्यैरर्थी गुणान्वितै:।
ततोऽहं भवत: कामं संवर्धयितुमागत:॥ ७५॥
इदं नागपुरं रम्यं ब्रूहि किं करवाणि ते।
 
 
अनुवाद
भीष्मजी! मैं आपकी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पांचाल देश से कुरुराज्य के इस सुन्दर हस्तिनापुर नगर में प्रतिभाशाली शिष्यों की सहायता से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु आया हूँ। आप मुझे बताइए, मुझे आपका कौन-सा प्रिय कार्य करना चाहिए?॥ 75 1/2॥
 
Bhishmaji! I have come from Panchal country to this beautiful city of Hastinapur in the Kuru kingdom to fulfill your desire, seeking the fulfillment of my desires with the help of talented disciples. Tell me, which of your favorite tasks should I do?॥ 75 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)