श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  1.130.73 
एकरात्रं तु ते ब्रह्मन् कामं दास्यामि भोजनम्।
एवमुक्तस्त्वहं तेन सदार: प्रस्थितस्तदा॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
"ब्राह्मण! यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हें एक रात का अच्छा भोजन दे सकता हूँ।" राजा द्रुपद की यह बात सुनकर मैं अपनी पत्नी और पुत्र सहित वहाँ से चला गया।
 
"Brahmin! If you wish, I can give you a good meal for one night." Upon hearing this from King Drupada, I left the place with my wife and son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)