Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.130.68: काल एक मित्र को दूसरे से अलग कर देता है, अथवा क्रोध मित्रता से दूर कर देता है। इस प्रकार मिट जाने वाली मित्रता की पूजा (विश्वास) मत करो। अपने हृदय से यह भावना निकाल दो कि हम दोनों एक दूसरे के मित्र थे।॥68॥ | mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
काल एक मित्र को दूसरे से अलग कर देता है, अथवा क्रोध मित्रता से दूर कर देता है। इस प्रकार मिट जाने वाली मित्रता की पूजा (विश्वास) मत करो। अपने हृदय से यह भावना निकाल दो कि हम दोनों एक दूसरे के मित्र थे।॥68॥
‘Time separates one friend from another or anger removes a person from friendship. Do not worship (trust) friendship which fades away in this manner. Remove from your heart the feeling that we both were friends of each other.’॥ 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥