Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.130.65: 'इसीलिए तो आप मुझसे यह कहने का दुस्साहस कर रहे हैं कि, 'हे राजन! मैं आपका मित्र हूँ!' समय के साथ-साथ जैसे-जैसे मनुष्य बड़ा होता जाता है, उसकी मित्रता भी कम होने लगती है। | mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'इसीलिए तो आप मुझसे यह कहने का दुस्साहस कर रहे हैं कि, 'हे राजन! मैं आपका मित्र हूँ!' समय के साथ-साथ जैसे-जैसे मनुष्य बड़ा होता जाता है, उसकी मित्रता भी कम होने लगती है।
'That is why you are having the audacity to say to me, "O King! I am your friend!" With the passage of time as a man grows older, his friendship also starts to diminish. 65.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥