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mahabharat 1.130.60: यह निर्णय करके मैं अपने प्रिय पुत्र और पत्नी को साथ लेकर राजा द्रुपद के पास गया, क्योंकि हम दोनों के बीच पहले से ही उनके प्रति स्नेह और प्रेम था।   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  1.130.60 
इति मत्वा प्रियं पुत्रं भीष्मादाय ततो ह्यहम्।
पूर्वस्नेहानुरागित्वात् सदार: सौमकिं गत:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
यह निर्णय करके मैं अपने प्रिय पुत्र और पत्नी को साथ लेकर राजा द्रुपद के पास गया, क्योंकि हम दोनों के बीच पहले से ही उनके प्रति स्नेह और प्रेम था।
 
Having made this decision, I took my beloved son and wife along with me and went to King Drupada due to our earlier affection and love for him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)