Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.130.51: मैं उस पुत्र के साथ उतना ही प्रसन्न था, जितना मेरे पिता भरद्वाज मेरे साथ थे। एक दिन गौधन से संपन्न ऋषियों के पुत्र एक गाय का दूध पी रहे थे। उन्हें देखकर मेरा छोटा पुत्र अश्वत्थामा भी बाल स्वभाव के कारण दूध पीने के लिए अधीर हो गया और रोने लगा। इससे मेरी आँखों में अन्धकार छा गया - मुझे दिशाओं को पहचानने में भी संदेह होने लगा। 51. | mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं उस पुत्र के साथ उतना ही प्रसन्न था, जितना मेरे पिता भरद्वाज मेरे साथ थे। एक दिन गौधन से संपन्न ऋषियों के पुत्र एक गाय का दूध पी रहे थे। उन्हें देखकर मेरा छोटा पुत्र अश्वत्थामा भी बाल स्वभाव के कारण दूध पीने के लिए अधीर हो गया और रोने लगा। इससे मेरी आँखों में अन्धकार छा गया - मुझे दिशाओं को पहचानने में भी संदेह होने लगा। 51.
I was as happy with that son as my father Bharadwaj was with me. One day, the sons of the sages who were rich in cattle were drinking the milk of a cow. Seeing them, my little son Ashwatthama also became impatient to drink milk due to his childish nature and started crying. Due to this, darkness covered my eyes – I started having doubts even in recognizing directions. 51.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥