श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.130.50 
अलभद् गौतमी पुत्रमश्वत्थामानमौरसम्।
भीमविक्रमकर्माणमादित्यसमतेजसम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
उन गौतमी कृपी ने मुझसे मेरा पुत्र अश्वत्थामा प्राप्त किया, जो सूर्य के समान तेजस्वी तथा पराक्रम और पुरुषार्थ में भयंकर है ॥50॥
 
That Gautami Kripi obtained from me my son Ashwatthama, who is as bright as the Sun and is fierce in bravery and effort. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)