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mahabharat 1.130.36-37: वैशम्पायनजी ने "बहुत अच्छा" कहकर कुमार भीष्म के पास जाकर उन्हें ब्राह्मण के सत्य वचन तथा अपने अद्भुत पराक्रम का वृत्तान्त सुनाया। कुमारों के वचन सुनकर भीष्म समझ गए कि ये आचार्य द्रोण हैं। 36-37   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  1.130.36-37 
वैशम्पायन उवाच
तथेत्युक्त्वा च गत्वा च भीष्ममूचु: कुमारका:॥ ३६॥
ब्राह्मणस्य वचस्तथ्यं तच्च कर्म तथाविधम्।
भीष्म: श्रुत्वा कुमाराणां द्रोणं तं प्रत्यजानत॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी ने "बहुत अच्छा" कहकर कुमार भीष्म के पास जाकर उन्हें ब्राह्मण के सत्य वचन तथा अपने अद्भुत पराक्रम का वृत्तान्त सुनाया। कुमारों के वचन सुनकर भीष्म समझ गए कि ये आचार्य द्रोण हैं। 36-37
 
Vaishampayana says, "Very good", he went to Kumar Bhishma and told him the true words of the Brahmin and also about his amazing valour. After listening to the words of the Kumars, Bhishma understood that they were Acharya Drona. 36-37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)