श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 35h
 
 
श्लोक  1.130.35h 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्ततो द्रोण: प्रत्युवाच कुमारकान्।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! जब राजकुमारों ने यह पूछा, तब द्रोण ने उन्हें बताया।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! When the princes asked this, Drona told them. 34 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)