श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.130.34 
कुमारा ऊचु:
अभिवादयामहे ब्रह्मन् नैतदन्येषु विद्यते।
कोऽसि कस्यासि जानीमो वयं किं करवामहे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
कुमार बोले - हे ब्रह्मन्! हम आपको नमस्कार करते हैं। अस्त्र-शस्त्र विद्या में यह अद्भुत कौशल अन्य किसी में नहीं है। हम जानना चाहते हैं कि आप कौन हैं, किसके पुत्र हैं। बताइए, हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं?॥ 34॥
 
Kumar said - O Brahman! We salute you. No one else has this amazing skill in weaponry. We want to know who you are, whose son you are. Tell us, what service can we do for you?॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)