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mahabharat 1.130.30: यह अद्भुत कार्य देखकर उन राजकुमारों की आँखें आश्चर्य से चमक उठीं और इसे महान आश्चर्य समझकर वे इस प्रकार बोले।   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.130.30 
तदवेक्ष्य कुमारास्ते विस्मयोत्फुल्ललोचना:।
आश्चर्यमिदमत्यन्तमिति मत्वा वचोऽब्रुवन्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यह अद्भुत कार्य देखकर उन राजकुमारों की आँखें आश्चर्य से चमक उठीं और इसे महान आश्चर्य समझकर वे इस प्रकार बोले।
 
Seeing this wonderful deed, the eyes of those princes lit up with wonder. Considering it a great wonder, they spoke as follows. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)