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mahabharat 1.130.3: क्रोध और आक्रोश से उसकी भौंहें तनी हुई थीं, आंखें लाल थीं; धन और समृद्धि के नशे में चूर होकर वह राजा द्रोण से इस प्रकार बोला।   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.130.3 
सक्रोधामर्षजिह्मभ्रू: कषायीकृतलोचन:।
ऐश्वर्यमदसम्पन्नो द्रोणं राजाब्रवीदिदम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
क्रोध और आक्रोश से उसकी भौंहें तनी हुई थीं, आंखें लाल थीं; धन और समृद्धि के नशे में चूर होकर वह राजा द्रोण से इस प्रकार बोला।
 
His eyebrows were twisted in anger and resentment, his eyes were red; intoxicated with wealth and prosperity, he spoke thus to King Drona.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)