श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.130.27 
द्रोण उवाच
एषा मुष्टिरिषीकाणां मयास्त्रेणाभिमन्त्रिता॥ २७॥
 
 
अनुवाद
द्रोण बोले, 'ये मुट्ठी भर कांटे हैं जिन्हें मैंने अस्त्र-मंत्र से पवित्र किया है।'
 
Drona said, 'These are a handful of thorns which I have consecrated with the weapon-mantra.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)