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mahabharat 1.130.26h: उस समय कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने द्रोण से कहा। 25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 26h
 
 
श्लोक  1.130.26h 
ततोऽब्रवीत् तदा द्रोणं कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
 
 
अनुवाद
उस समय कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने द्रोण से कहा। 25 1/2॥
 
At that time Kuntinandan Yudhishthira said to Drona. 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)